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Wednesday, 16 September 2015

तुलसी का छोटा सा प्रयोग जरुर करे, Health Benefits and Medicinal Uses of Eating Basil (Tulsi), benefit of eating Basil

28 Amazing Benefits and Uses Of Basil Leaves:

तुलसी की 21 से 35 पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भांति पीस लें और 10 से 30 ग्राम मीठी दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खायें।
ध्यान रहे दही खट्टा न हो और यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें।
छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी रस शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भुलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं। दवा दिनभर में एक बार ही लें

कैंसर जैसे असह्य दर्द और कष्टप्रद रोगो में २-३ बार भी ले सकते हैं।

इसके तीन महीने तक सेवन करने से खांसी, सर्दी, ताजा जुकाम या जुकाम की प्रवृत्ति, जन्मजात जुकाम, श्वास रोग, स्मरण शक्ति का अभाव, पुराना से पुराना सिरदर्द, नेत्र-पीड़ा, उच्च अथवा निम्न रक्तचाप, ह्रदय रोग, शरीर का मोटापा, अम्लता, पेचिश, मन्दाग्नि, कब्ज, गैस, गुर्दे का ठीक से काम न करना, गुर्दे की पथरी तथा अन्य बीमारियां, गठिया का दर्द, वृद्धावस्था की कमजोरी, विटामिन ए और सी की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग, सफेद दाग, कुष्ठ तथा चर्म रोग, शरीर की झुर्रियां, पुरानी बिवाइयां, महिलाओं की बहुत सारी बीमारियां, बुखार, खसरा आदि रोग दूर होते हैं।

जुकाम, हरारत, फ्लू व मौसमी बुखार में तुलसी, काली मिर्च व मिश्री मिलाकर पानी में पकाकर, अथवा तीनों को पीसकर गोलियाँ बना दिन में तीन-चार बार लेने से लाभ होता है।

खाँसी में तुलसी की पत्तियों व अदरक को पीसकर शहद के साथ चाटने से लाभ पहुँचता है।
दस्त लगने पर तुलसी के 10 पत्तों को एक माशा जीरे में पीसकर दिन में 3-4 बार चाटने से दस्त बंद हो जाते हैं।
मुख की दुर्गंध दूर करने के लिए दिन में दो बार तुलसी के 4-5 पत्ते चबाएँ।
घाव शीघ्र ठीक करने के लिए तुलसी पत्र व फिटकरी खूब बारीक पीसकर घाव पर छिड़कें।
जलने पर तुलसी का रस व नारियल तेल फेंटकर लगाने से जलन दूर होगी, जख्‍म भी ठीक होंगे व जख्म का निशान भी धूमिल हो जाता है।
चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए तथा झाँई व मुहाँसे के दाग मिटाने के लिए तुलसी के पत्तों को पीसकर उबटन करें।
बुद्धि व स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए प्रतिदिन तुलसी के पाँच-सात पत्ते जल के साथ निगलें।
मूत्रदाह की शिकायत में तुलसी के पत्तों का दो तोला रस पावभर दूध व डेढ़ पाव पानी में पिलाकर पी जाएँ।
गठिया दूर करने के लिए तुलसी की जड़, पत्ते, डंठल, मंजरी और बीज बराबर मात्रा में लेकर कूट, छानकर पुराने गुड़ के साथ मिला लें और बकरी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
त्वचा संबंधी रोगों के लिए तुलसी के पत्तों के साथ पकाया हुआ तिल्ली का तेल लगाएँ।
इसके साथ ही कीड़े-मकौड़े काटने पर, गर्मी में लू लगने पर तथा रक्त शुद्धि के लिए भी तुलसी उपयोगी है।

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