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Sunday 20 September 2015

नींद के लिए सर्पगंधा | Ayurveda - अच्छी नींद के लिए घरेलू उपचार | नींद के आभाव को दूर करने के वैदिक उपाय

नींद के आभाव को दूर करने के वैदिक उपाय:

सर्पदंश तथा कीटदंश के उपचार में इसे अत्यन्त ही लाभकारी बताया गया है।

सर्पगंधा का वानस्पतिक नाम रावोल्फिया सर्पेन्टीना (Rauvolfia serpentina) है।

अंग्रेजी में इसे सर्पेन्टीन (Serpentine) तथा स्नेक रूट (Snake root) नामों से जाना जाता है। हिन्दी में इसके अनेक नाम जैसे- छोटा चाँद, धवलबरूआ, नकुलकन्द, नाकुलीकन्द, हरकाई चन्द्रा, रास्नाभेद हैं। उड़िया में इसे ब्रनेरा, धनवरूआ, सनोचाडो, 
बंगला में नाकुली, गन्धरास्ना, ,,तेलगू में पाताअगन्धि, मलयालम में चुवन्ना अविकपोरी 
.संस्कृत में सर्पगंधा ,धवल विटप , चंद्रमार ,चन्द्रिका ,,.बिहार में धनमरवा ,चंदमरवा ,इसरगज,,.उड़िया में पातालगरुड़ ,,,मराठी में साय्सन ,अद्कई,,.गुजराती में अमेल्पोदी
तमिल में चिवनअमलपोडी ,सर्प्गंठी,,मलयालम में चिवन , अवाल्पोदी ,,कर्णाटक में सुत्रनावी आदि नामों से पुकारा जाता है


उपयोग-------1-हांई ब्लड प्रेशर के उपचार हेतु सर्पगंधा सम्पूर्ण विश्व में सर्वोत्तम औषधि मानी जाती है । इसके उपयोग से उच्च रक्तचाप में जादुई कमी आती है,नींद भी अच्छी आती है तथा भ्रम आदि मानसिक विकारों में भी आराम मिलता है । यदि आपको उपरोक्त तकलीफें हैं तो सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण का आधा छोटा चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन कीजिये ,परिणाम मनोनुकूल मिलेगा ।

२--------अगर आप अनिद्रा के रोगी हैं तो रात को सोने के समय १/४ छोटा चम्मच सर्पगंधा की जड़ का पावडर घी के साथ मिला कर खा लें ,नींद आ जायेगी। खांसी वाले रोगियों की अनिद्रा में भी यह लाभदायक है ।
----सर्पगंधा घनवटी २ गोली. दिमाग-दोषहरी २ गोली, खमीरा गावजवान अम्बरी जवाहरवाला एक चमच्च, सीरप शंखपुष्पी ४ चम्मच-यह सब एक मात्रा हैं| केवल रात को सोते समय पहले उक्त खमीरा खाइये| फिर एक कप दूध में ४ चमच्च सीरप शंखपुष्पी घोल लें| फिर उक्त चारों गोलियों को उस एक कप दूध से निगल लें| 

रोगन लबूब सबा-यह यूनानी दवाओं से निर्मित एक केश तेल हैं| इसे केवल रात को सोते समय ही सिर के बीच में चुपड़ कर १५ मिनिट तक हलके हलके मलें| तीसरे दिन से गहरी सुखद नीद आने लगती हैं| इसके बाद इन दवाओं का उपयोग छोड़ दें| इसकी आदत नहीं पड़ती| केवल रात को ही उपयोग करे| दिन में न करे अन्यथा दिन भर उंघते रहेंगें| 

३-------परंपरांगत चिकित्सा में सर्पगंधा का प्रयोग पागलपन की दवा के रूप में भी किया जाता रहा है । उन्माद और अपस्मार में जब रोगी बहुत अधिक उत्तेजना का शिकार हो जाता है तो एक ग्राम चूर्ण २५० मिलि० बकरी के दूध के साथ खिलाएं ,चूर्ण में गुड मिला लें ,यह दिन में दो बार दीजिये ,आराम दिखायी देगा । 
-----किंतु यह दवा लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए नहीं है।

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